होली : रंगों का गाँव, और भीतर का सूना आँगन - डॉ. विनय कुमार वर्मा...
दरवाज़े अपने आप खुल जाते। हर घर उस टोली का स्वागत करता- कहीं गुड़-चना, कहीं ठंडाई, कहीं गुझिया की पहली खेप। महिलाएँ भीतर रसोई में लगी रहतीं, पर मन आँगन में घूमता रहता- कब टोली आए, ...