गौ हत्या और सत्ता की दोहरी नीति पर बरसे ज्योतिर्मठाधीश्वर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूछा- कब रुकेगा गौवंश का कटान?

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चौबेपुर (वाराणसी) क्षेत्र के भगतुआ स्थित भदीवा गांव में पूर्व ब्लॉक प्रमुख रश्मि पाठक के आवास पर आयोजित 'गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध' धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए ज्योतिर्मठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार की नीतियों और वर्तमान राजनीति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने देश में जारी गौवंश के कटान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज गौ माता और सनातन धर्म के नाम पर राजनीति तो खूब हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता सत्ता में आते ही अपने संकल्पों को भूल जाते हैं।

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनेताओं के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान नेता हिंदू धर्म, गौ रक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के नाम पर जनता से वोट मांगते हैं। परंतु, सत्तासीन होने के बाद उन्हीं के शासनकाल में बड़े पैमाने पर अवैध कटान की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने सीधे शब्दों में पूछा कि जो लोग गौ माता के नाम पर राजनीति की रोटियां सेकते हैं, वे आखिर यह क्यों नहीं बताते कि यह क्रूर कटान कब पूरी तरह से बंद होगा?

 

शास्त्रों का हवाला और महापाप का भागीदार

 

गौ माता के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि हिंदू धर्म में गाय को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। शास्त्रों में गौ सेवा को परम पुण्य और गौ हत्या को महापाप की श्रेणी में रखा गया है। देश में जारी गौ हत्या को उन्होंने न केवल प्रशासनिक विफलता, बल्कि करोड़ों सनातनियों की धार्मिक आस्था पर एक गहरा आघात बताया।

 

धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सचेत किया कि गौ हत्या के पाप की भागीदारी बेहद व्यापक होती है। शास्त्रों के अनुसार, केवल गौ हत्या करने वाला ही दोषी नहीं है, बल्कि इसका मूक समर्थन करने वाला, इसकी अनुमति देने वाला, इस क्रूरता पर चुप रहने वाला और इससे किसी भी रूप में लाभ उठाने वाला व्यक्ति भी उतने ही बड़े पाप का भागीदार बनता है।

 

राजनीति में गिरती नैतिकता और गौशालाओं की दुर्दशा पर सरकार को घेरा

 

स्वामी जी ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की राजनीति में सिद्धांत और नैतिकता पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं। सत्ता पाने और उसे बचाए रखने के लिए भ्रष्टाचार, धनबल और चंदे की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि केवल भाषणों से गौ माता की रक्षा नहीं होने वाली। अगर सरकार वास्तव में संवेदनशील है, तो उसे गौ संरक्षण के लिए कठोर और प्रभावी कानून लागू करने होंगे और अवैध कटान करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही उन्होंने देश की गौशालाओं की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज कई स्थानों पर गौवंश भूख और उचित चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ रहा है।

 

समाज को एकजुट होने का किया आह्वान

 

अपने संबोधन के अंत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवन पद्धति है। धर्म और संस्कृति की रक्षा की जिम्मेदारी केवल साधु-संतों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय का आह्वान करते हुए कहा कि यदि आज समाज अपनी संस्कृति और गौ माता की रक्षा के लिए एकजुट होकर जागरूक नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।

 

इस धार्मिक सभा में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अवधेश पाठक, मुन्ना पाठक, सौरभ पाठक, अखिलेश पाठक 'चिंटू' और विद्या शंकर त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरा परिसर रह-रहकर 'हर हर महादेव' और 'गौ माता की जय' के गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान होता रहा।

 

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