वाराणसी/मिर्जापुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने वर्तमान कार्यकाल के अंतिम पूर्ण बजट में पूर्वांचल की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मानचित्र पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है। बुधवार को विधानसभा में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में वाराणसी और मिर्जापुर स्थित विंध्यवासिनी देवी धाम को पर्यटन के आधुनिक हब के रूप में विकसित करने के लिए 100-100 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
यह बजट न केवल धार्मिक आस्था को सम्मान देता है, बल्कि इसे रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने का एक व्यापक ब्लूप्रिंट भी है।
काशी: आध्यात्मिक राजधानी का कायाकल्प और बुनियादी ढांचा
वाराणसी (काशी) को लेकर सरकार की रणनीति 'पुराने को बेहतर और नए को सुदृढ़' बनाने की है। बजट में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के आसपास की सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
· यात्री सुविधाएं: श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए घाटों के सौंदर्यीकरण, गंगा की स्वच्छता, अत्याधुनिक लाइटिंग और बेहतर पार्किंग व्यवस्था के लिए भारी निवेश किया जाएगा।
· कनेक्टिविटी का जाल: काशी को पूर्वांचल के अन्य जिलों से जोड़ने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण, रिंग रोड का विस्तार और नए फ्लाईओवर परियोजनाओं को गति दी जाएगी। इसके साथ ही लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भी बजट में समर्थन दिया गया है।
· स्मार्ट गवर्नेंस: शहर में जल निकासी (Drainage) और पेयजल की पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान के साथ-साथ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सीसीटीवी सर्विलांस और ट्रैफिक मैनेजमेंट को और मजबूत किया जाएगा।
विंध्य कॉरिडोर: मिर्जापुर में पर्यटन की नई क्रांति
मिर्जापुर के विंध्यवासिनी धाम के लिए सरकार ने विशेष उदारता दिखाई है। 100 करोड़ के मूल बजट के अतिरिक्त, जनपद के त्रिकोणीय क्षेत्र—माँ विंध्यवासिनी, माँ अष्टभुजा और माँ काली खोह मंदिर—के परिक्रमा पथ और जनसुविधाओं के विकास हेतु 200 करोड़ रुपये की अलग से व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य विंध्य क्षेत्र को वाराणसी के साथ एक 'रिलीजियस सर्किट' के रूप में जोड़ना है।
काशी-विंध्य विकास प्राधिकरण: क्षेत्रीय विकास का नया मॉडल
क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार ने 'काशी-विन्ध्य क्षेत्र क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण' के गठन का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र जिलों को शामिल किया गया है। इस कदम से पूरे क्षेत्र का समेकित विकास सुनिश्चित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे।
रोजगार और कौशल विकास पर केंद्रित योजनाएं
बजट में केवल ईंट-पत्थरों के विकास की बात नहीं है, बल्कि स्थानीय कारीगरों के उत्थान का भी मार्ग प्रशस्त किया गया है:
· हैंडलूम और एमएसएमई: विश्वप्रसिद्ध बनारसी साड़ी और हस्तशिल्प उद्योग को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष सहायता योजनाएं लाई गई हैं।
· कौशल विकास: पर्यटन और होटल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में युवाओं को तैयार करने के लिए स्किल डेवलपमेंट केंद्रों का विस्तार किया जाएगा।
· महिला सशक्तिकरण: पर्यटन सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला गाइडों के लाइसेंस शुल्क को माफ करने का क्रांतिकारी कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों की राय: पर्यटन बनेगा अर्थव्यवस्था का आधार
पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस बजट का स्वागत किया है। टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च से पर्यटकों की प्रवास अवधि (Stay) बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ स्थानीय होटल और परिवहन उद्योग को होगा। वहीं, संध्या सिंह (निदेशक, टीएफजी टूर्स) का मानना है कि बजट के इन प्रावधानों से पूर्वांचल विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।