गया। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ वैश्विक राजनीति या तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों के जीवन तक पहुंच गया है। खासकर भारत के उन परिवारों पर इसका गहरा असर देखने को मिल रहा है, जिनके सदस्य खाड़ी देशों में काम करते हैं। उड़ानों के रद्द होने और सुरक्षा हालात बिगड़ने के कारण सैकड़ों भारतीय अपने घर लौटने में असमर्थ हैं।
इसी संकट के बीच बिहार के गया जिले के खंडेल गांव का एक परिवार गहरे असमंजस और चिंता में है। यहां के रहने वाले मिन्हाज, जो कतर में नौकरी करते हैं, अपनी ही शादी में शामिल होने के लिए भारत नहीं लौट पा रहे हैं। उनकी शादी 30 मार्च को जहानाबाद जिले के एरकी गांव में तय है, लेकिन युद्ध के कारण उनकी फ्लाइट लगातार रद्द हो रही है।
मिन्हाज के पिता जलील शाह ने बताया कि उनके बेटे ने 26 मार्च को घर लौटने के लिए टिकट बुक कराया था, लेकिन हालात ऐसे बने कि अब तक दो बार फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है। परिवार के लिए यह स्थिति बेहद भावुक और तनावपूर्ण बन गई है, क्योंकि शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं कार्ड छप चुके हैं, पगड़ी तैयार है, बारात की गाड़ियों से लेकर दावत तक सब कुछ तय हो चुका है।
घर में उत्सव का माहौल होना चाहिए था, लेकिन अब हर कोई दूल्हे के लौटने की राह देख रहा है। जलील शाह बताते हैं कि उन्होंने दुल्हन पक्ष से हाथ जोड़कर स्थिति समझाई है और जरूरत पड़ने पर शादी की तारीख आगे बढ़ाने का आग्रह भी किया है। परिवार को अब किसी चमत्कार का इंतजार है, ताकि उनका बेटा सुरक्षित घर लौट सके।
यह मामला अकेला नहीं है। खंडेल गांव और उसके आसपास के इलाके इमलीथान, जयपुर, रतनपुर और पांडौल के लगभग 400 लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं। इन गांवों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक विदेशों में काम करने वाले लोगों पर निर्भर है। लगभग हर घर का कोई न कोई सदस्य बाहर नौकरी करता है, जो त्योहारों और खास मौकों पर घर लौटता है।
लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। ईद और अन्य त्योहारों के समय भी लोग अपने परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, इसी महीने इन गांवों में करीब 40 से 50 शादियां तय हैं, जिन पर अब अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर असर पड़ा है, जिसका सीधा असर उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर भी पड़ रहा है। ऐसे में विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी फिलहाल चुनौती बनी हुई है।
इस पूरी स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर सीमाओं से कहीं आगे तक जाता है कभी तेल की कीमतों में, तो कभी किसी पिता की आंखों में बेटे के इंतजार के रूप में।