लखनऊ/वाराणसी। यूपी के आसमान में मंगलवार की शाम खगोलीय और आध्यात्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। साल के पहले पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा तांबे जैसी लाल आभा (ब्लड मून) के साथ चमकता नजर आया। शाम 6:48 बजे ग्रहण के मोक्ष (समाप्त) होने के बाद जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों में फिर से रौनक लौट आई।
आस्था का सैलाब: मंदिरों के शुद्धिकरण के बाद खुले कपाट
चंद्रग्रहण के सूतक काल के कारण सुबह 9 बजे से ही पूरे प्रदेश में मंदिरों के पट बंद कर दिए गए थे। शाम को ग्रहण समाप्त होते ही पूरे विधि-विधान के साथ देवालयों का शुद्धिकरण किया गया।

· मथुरा और अयोध्या: भगवान बांके बिहारी और रामलला के दरबार को गंगाजल से धोया गया, जिसके बाद संध्या आरती के साथ भक्तों के लिए दर्शन फिर से शुरू हुए।
· काशी की गंगा आरती: विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर होने वाली मां गंगा की दैनिक आरती ग्रहण के कारण अपने निर्धारित समय से करीब सवा घंटे की देरी से शुरू हुई।
वैज्ञानिक रहस्य: क्यों लाल हुआ चंद्रमा?
विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू के अनुसार, इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया (Umbra) से होकर गुजरा। पृथ्वी के वायुमंडल ने सूरज की नीली रोशनी को बिखेर दिया और केवल लाल तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी ही चंद्रमा तक पहुंच पाई। इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण आसमान में 'ब्लड मून' का दुर्लभ नजारा देखने को मिला।
प्रमुख शहरों का हाल
प्रदेश के विभिन्न शहरों में ग्रहण का प्रभाव और दृश्य कुछ इस प्रकार रहा:
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शहर |
दृश्य और प्रभाव |
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वाराणसी |
सफेद चंद्रमा धीरे-धीरे सुर्ख लाल हुआ। आरती में भारी भीड़ उमड़ी। |
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लखनऊ |
आसमान साफ होने के कारण 'ब्लड मून' का स्पष्ट दीदार हुआ। |
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प्रयागराज |
ग्रहण खत्म होने के बाद पूर्ण चंद्रमा की दूधिया रोशनी बिखरी। |
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आगरा |
ताजनगरी में भी चंद्रमा की बदलती रंगत ने लोगों को आकर्षित किया। |
धार्मिक अनुष्ठान और परंपराएं
ग्रहण लगने से पहले सुबह 8:15 बजे अयोध्या के राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में प्रभु को विशेष भोग लगाया गया था। ग्रहण काल के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किया और मोक्ष के बाद पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य की परंपरा निभाई। मंदिरों में साफ-सफाई के बाद विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल होने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।