लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र से किशोरियों को शादी का सपना दिखाकर राजस्थान में बेचने वाले अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह की जांच में रोज नए और हैरान करने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को निशाना बनाता था। उनकी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी जुटाकर वॉट्सएप के जरिए राजस्थान भेजी जाती थीं, जहां उनकी कीमत तय होती थी और फिर उन्हें शादी के नाम पर बेच दिया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क पिछले करीब छह वर्षों से सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। गिरोह के सदस्य गांवों और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों पर नजर रखते थे। किशोरियों की तस्वीरें लेने के बाद उन्हें संभावित खरीदारों तक पहुंचाया जाता था। राजस्थान में बैठे गिरोह के संचालक इन तस्वीरों के आधार पर सौदे तय करते थे। एक किशोरी की कीमत ढाई लाख रुपये से शुरू होती थी, जो परिस्थितियों के अनुसार और अधिक भी हो सकती थी।
पुलिस के मुताबिक इस अवैध कारोबार में शामिल स्थानीय एजेंटों को हर सौदे पर एक से डेढ़ लाख रुपये तक का कमीशन मिलता था। शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने छह से अधिक लड़कियों की तस्करी की बात स्वीकार की है, लेकिन जांच में अब तक 20 से ज्यादा किशोरियों को राजस्थान भेजे जाने के संकेत मिले हैं। आशंका है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ जब मोहनलालगंज के गनियार गांव निवासी एक महिला ने अपनी दो नाबालिग नातिनों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। 16 और 12 वर्ष की दोनों बहनों के अचानक गायब होने से परिवार में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने विशेष जांच टीमों का गठन किया और खोज अभियान शुरू किया।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी, मोबाइल सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच को आगे बढ़ाया। करीब 24 दिनों तक चली पड़ताल में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई। आखिरकार 18 मई को दोनों किशोरियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें राजस्थान ले जाकर शादी कराने के बहाने बेचने की तैयारी चल रही थी।
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए अतरौली क्रॉसिंग के पास से तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मानव तस्करी के इस संगठित नेटवर्क की कई परतें खुलीं। हालांकि गिरोह की कथित सरगना सोनम, भूपेंद्र चौधरी सहित चार मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं। उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह के संबंध किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं और अब तक कितनी किशोरियों को शादी के नाम पर तस्करी कर बेचा जा चुका है। राजस्थान समेत अन्य राज्यों में सक्रिय सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यह मामला मानव तस्करी के संगठित और खतरनाक नेटवर्क की भयावह तस्वीर पेश कर रहा है।