फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर MLC को डेढ़ घंटे तक डराता रहा साइबर ठग, महिला के नाम पर रजिस्टर था नंबर, शक हुआ तो ऐसे खुल गई पोल...

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सुल्तानपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को मुंबई एटीएस क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने वाले एक शातिर ठग ने भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य शैलेन्द्र प्रताप सिंह को फोन कर लगभग डेढ़ घंटे तक मानसिक दबाव में लेने की कोशिश की। आरोपी ने कथित डिजिटल अरेस्टका डर दिखाकर उनसे व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने और ठगी की साजिश रची, हालांकि समय रहते मामला खुल गया और ठग की चाल नाकाम हो गई।

 

साइबर क्राइम थाना सुल्तानपुर के प्रभारी अखण्डदेव मिश्रा के अनुसार, यह कॉल 2 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर आई थी, जो लगभग 1 बजकर 39 मिनट तक जारी रही। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई एटीएस क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए एमएलसी को एक गंभीर मामले में फंसाने की बात कही। उसने बातचीत के दौरान ऐसा माहौल बनाया मानो वह किसी बड़ी जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी हो और एमएलसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी चल रही हो।

 

 

साइबर अपराधी ने वीडियो कॉल के माध्यम से बात की और खुद को भरोसेमंद दिखाने के लिए पुलिस की वर्दी भी पहन रखी थी। इस तरह उसने पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की ताकि वह उसकी बातों पर आसानी से भरोसा कर लें। बातचीत के दौरान आरोपी ने एमएलसी से कहा कि उनके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है और उन्हें तुरंत सहयोग करना होगा। इसी बहाने उसने आधार कार्ड की जानकारी मांगते हुए उसे भेजने के लिए कहा।

 

करीब एक घंटे से अधिक समय तक यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान आरोपी लगातार कार्रवाई का भय दिखाकर जानकारी लेने की कोशिश करता रहा। हालांकि, जब एमएलसी के सहयोगियों को इस कॉल पर संदेह हुआ तो उन्होंने सतर्कता बरतते हुए उसी नंबर पर दोबारा संपर्क कर मामले की पुष्टि करने की कोशिश की। इसी दौरान कॉल करने वाले व्यक्ति की असलियत सामने आ गई और यह साफ हो गया कि वह किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी नहीं बल्कि एक साइबर ठग है।

 

इसके बाद जब इस नंबर की जांच की गई तो पता चला कि वह मोबाइल नंबर मध्य प्रदेश के सतना जिले की एक महिला के नाम पर पंजीकृत है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी ने फर्जी पहचान बनाकर एमएलसी को डराने और उनसे जानकारी हासिल करने की योजना बनाई थी।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एमएलसी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने तुरंत स्थानीय पुलिस से शिकायत की। उनकी तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम थाना सुल्तानपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने इस प्रकरण को सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 66D के तहत दर्ज किया है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर ठगी से जुड़े मामलों में लागू होती है।

 

साइबर थाना प्रभारी अखण्डदेव मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कॉल की लोकेशन, इस्तेमाल किए गए डिवाइस और नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपी तक पहुंचा जा सके।

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में डिजिटल अरेस्टजैसे नए तरीके अपनाकर साइबर ठग लोगों को डराने और ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से पैसे या निजी जानकारी मांगते हैं।

 

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अगर किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा इस तरह की कॉल कर खुद को किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताया जाए और पैसे या दस्तावेज मांगे जाएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी परिस्थिति में निजी जानकारी साझा न करें और नजदीकी साइबर थाने या हेल्पलाइन नंबर पर इसकी सूचना दें।

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