वाराणसी/बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के रामनगर थाना क्षेत्र स्थित इब्राहिमपुर गांव में 16 वर्षीय किशोर यश सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे प्रदेश के स्वर्णकार समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। किशोर का शव फंदे से लटका मिला था, लेकिन परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए पड़ोसियों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है।
घटना के चार दिन बाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। मृतक यश सोनी, पुत्र- बिरजू सोनी की मौत 11 मार्च 2026 को हुई थी। परिवार का कहना है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। परिजनों के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती नजर आई। कई प्रयासों और दबाव के बाद 13 मार्च को जाकर मामला दर्ज किया गया, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटना के विरोध में स्वर्णकार समाज के विभिन्न संगठनों ने खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के पदाधिकारियों ने इसे केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान और सुरक्षा का मामला बताया है। संगठन के उपाध्यक्ष जितेंद्र सेठ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अपील की है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाज के नेताओं का कहना है कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को सड़कों से लेकर संसद तक उठाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और कानूनी दायरे में रहेगा, लेकिन न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
इसी कड़ी में 20 मार्च को सुबह 11 बजे बाराबंकी पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया गया है। “सोनार नरहरी सेना” के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में लोग इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है। प्रदर्शन को लेकर जारी संदेशों में साफ कहा गया है कि अब यह चेतावनी नहीं, बल्कि “आर या पार” की लड़ाई है।
समाज के लोगों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका मानना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर आम नागरिक के सम्मान और सुरक्षा की है।
घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन बढ़ते जनदबाव के चलते आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। अब सबकी नजरें पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पीड़ित परिवार को कब और कैसे न्याय मिलता है।