पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब पूर्व सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इसी क्रम में ममता बनर्जी सरकार में दमकल मंत्री रह चुके Sujit Bose को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगर निगम भर्ती घोटाले में लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने उन पर अवैध नियुक्तियों के बदले पैसे और संपत्ति लेने का आरोप लगाया है।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगरपालिका में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इसके बदले उन्हें नकद रकम और कई फ्लैट मिले। एजेंसी को उनके बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा होने के प्रमाण भी मिले हैं। गिरफ्तार करने के बाद ईडी ने मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया।
सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे ईडी ने सुजीत बोस को कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित अपने दफ्तर में पूछताछ के लिए बुलाया था। नगर निगम भर्ती घोटाले से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने उनसे लगभग 10 घंटे तक लगातार सवाल-जवाब किए। पूछताछ के दौरान उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। देर रात करीब 9 बजकर 15 मिनट पर ईडी ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
जांच एजेंसी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन पांचू रॉय और सुजीत बोस के निर्देश पर अयान शील की एजेंसी की मदद से उम्मीदवारों की OMR शीट में हेरफेर किया गया। यहां तक कि जिन अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शून्य अंक मिले थे, उन्हें भी कथित सिफारिश और पैसों के दम पर नौकरी दे दी गई।
इस मामले में पांचू रॉय के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि भर्ती घोटाले से जुटाई गई रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
सुजीत बोस पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें ईडी ने समन भेजा था। इसके अलावा 10 अक्टूबर 2025 को ईडी ने उनके और उनके बेटे से जुड़े दफ्तरों, रेस्तरां और करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस कार्रवाई में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने का दावा किया गया था।
अगर सुजीत बोस के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वामपंथी संगठन डीवाईएफआई से की थी। वह तत्कालीन परिवहन मंत्री सुभाष चक्रवर्ती के करीबी माने जाते थे। हालांकि 90 के दशक में दोनों के बीच दूरी बढ़ी और बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया।
साल 2006 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन अपने पूर्व राजनीतिक गुरु सुभाष चक्रवर्ती के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2009 में सुभाष चक्रवर्ती के निधन के बाद उनकी पत्नी रमाला चक्रवर्ती के खिलाफ चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। बाद में 2021 में जीत दर्ज कर वह ममता सरकार में मंत्री बनाए गए।
हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बड़ा झटका लगा। बिधाननगर सीट से भाजपा उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी ने उन्हें 37 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक क्षेत्र में खराब सड़कें, जलभराव, गंदगी और नागरिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर जनता में भारी नाराजगी थी, जिसका असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
जिस नगर निगम भर्ती घोटाले में उनकी गिरफ्तारी हुई है, वह पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों और नगरपालिकाओं में हुई कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़ा हुआ है। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ईडी की जांच में अब तक यह सामने आया है कि राज्य के करीब 60 नगर निगमों और नगरपालिकाओं में लगभग 5000 लोगों की कथित तौर पर अवैध तरीके से भर्ती की गई। इनमें मजदूर, क्लर्क, ड्राइवर, स्वीपर, हेल्पर, पंप ऑपरेटर, एम्बुलेंस अटेंडेंट और अन्य कई पद शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला केवल भर्ती तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए करोड़ों रुपये की अवैध वसूली भी की गई।