तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री और डीएमके नेता Udhayanidhi Stalin के हाथ से कुर्सी जाने के बाद भी सनातन विरोध कम नहीं हो रहा है। स्टालिन ने मंगलवार को सनातन धर्म के खिलाफ एक बार फिर जहर उगला है। मंगलवार को विधानसभा कहा कि यह समाज को बांटने वाला विचार है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
विधानसभा के पहले दिन शपथ ग्रहण और नए राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच उदयनिधि ने अभिनेता से मुख्यमंत्री बने Vijay के शपथ ग्रहण समारोह का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि समारोह में तमिल संस्कृति और परंपरा का अपमान किया गया। उनका कहना था कि तमिलनाडु का पारंपरिक राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ कार्यक्रम में सबसे पहले होना चाहिए था, लेकिन इसे तीसरे स्थान पर रखा गया।
उदयनिधि ने विधानसभा में कहा कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम में तमिल पहचान और भाषा को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि तमिल समाज अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगा।
दरअसल, 10 मई को हुए मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ बजाया गया था, उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और अंत में तमिल राज्य गीत प्रस्तुत किया गया। इसी क्रम को लेकर डीएमके नेताओं ने आपत्ति जताई है।
तमिलनाडु विधानसभा के नए सत्र के पहले दिन विधायकों ने शपथ ली और मुख्यमंत्री विजय ने सदन में अपना पहला संबोधन भी दिया। लेकिन राजनीतिक चर्चा का केंद्र उदयनिधि का सनातन धर्म पर दिया गया बयान बन गया।
2 सितम्बर 2023 को सनातन धर्म को बताया था डेंगू, मलेरिया
यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की हो। इससे पहले 2 सितंबर 2023 को उन्होंने एक कार्यक्रम में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया, बुखार और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी। उस दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ चीजों का केवल विरोध नहीं किया जाता बल्कि उन्हें पूरी तरह समाप्त करना जरूरी होता है।
उनके इस बयान पर देशभर में भारी विरोध हुआ था। हिंदू संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने इसे करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान बताया था। विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका विरोध हिंदू धर्म से नहीं बल्कि सनातन व्यवस्था की उन परंपराओं से है, जिन्हें वे सामाजिक भेदभाव और असमानता से जोड़ते हैं।
उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि तमिलनाडु में पिछले सौ वर्षों से सामाजिक न्याय और समानता के लिए सनातन व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठती रही है। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर और पेरियार का जिक्र करते हुए कहा था कि सामाजिक कुरीतियों और जातिगत भेदभाव के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन होते रहे हैं।
उदयनिधि के बयान पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। 4 मार्च 2025 को Supreme Court of India ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपने शब्दों के प्रभाव को समझना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की थी कि वह कोई आम व्यक्ति नहीं हैं और उन्हें अपने बयान के परिणामों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था।
इसी बीच तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को कई बड़े घटनाक्रम भी देखने को मिले। मुख्यमंत्री विजय ने राज्यभर में 717 शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश जारी किया। सरकार के अनुसार मंदिरों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास स्थित दुकानों को अगले दो सप्ताह में बंद कर दिया जाएगा। इस फैसले को विजय सरकार की बड़ी सामाजिक पहल माना जा रहा है।
वहीं, तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के विधायक प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा का नया स्पीकर निर्विरोध चुन लिया गया। मुख्यमंत्री विजय ने स्वयं उनके नाम का प्रस्ताव रखा था।
दूसरी ओर एआईएडीएमके में भी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली। पार्टी के एक गुट के नेता सीवी षणमुगम ने विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। दावा किया जा रहा है कि उनके साथ करीब 30 विधायक भी टीवीके सरकार के समर्थन में हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मंशा एआईएडीएमके को तोड़ने की नहीं है और एडप्पादी पलानीसामी ही उनके नेता रहेंगे।
इसी दौरान मुख्यमंत्री विजय द्वारा अपने ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को राजनीतिक मामलों का विशेष कार्य अधिकारी नियुक्त किए जाने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। विपक्ष इसे अंधविश्वास से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि समर्थक इसे मुख्यमंत्री का निजी विश्वास बता रहे हैं।
उधर, टीवीके सरकार को 13 मई को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना करना है। इससे पहले विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को मद्रास हाईकोर्ट ने विश्वास मत सहित किसी भी मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया था। अब उन्होंने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
तमिलनाडु में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच सनातन धर्म पर उदयनिधि का बयान आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।