पश्चिम में युद्ध का असर: वैश्विक तनाव से हिला बाजार, 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों के 13 लाख करोड़ स्वाहा

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने 19 मार्च (गुरुवार) को ऐसा झटका देखा, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 22 महीने बाद बाजार में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के इस कारोबारी दिन सेंसेक्स 2,497 अंकों यानी 3.26% की भारी गिरावट के साथ 74,207 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 776 अंकों की गिरावट के साथ 23,002 के स्तर तक फिसल गया। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली, जिसने पूरे बाजार को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई।

 

विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। इस तरह के हालात में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे कंपनियों का मुनाफा घट सकता है। ऐसे में निवेशक जोखिम से बचने के लिए शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिसका सीधा असर बाजार में गिरावट के रूप में सामने आता है।

 

इस संकट का एक बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 6% से ज्यादा उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं भारत के लिए अहम इंडियन बास्केटकी कीमतें 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की खबर है। तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ावा देता है, जिससे बाजार की धारणा और कमजोर हो जाती है।

 

वैश्विक बाजारों का असर भी भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा। जापान का निक्केई इंडेक्स 3.38% टूटकर बंद हुआ, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 2.73% नीचे आ गया। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी 18 मार्च को कमजोरी दर्ज की गई थी, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 सभी लाल निशान में बंद हुए। इन वैश्विक संकेतों ने भारतीय निवेशकों के मनोबल को और कमजोर कर दिया।

 

इस बीच बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ी खबर ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद बैंक के शेयर में 5.11% की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 800 रुपए तक आ गया। चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में बैंक के आंतरिक कामकाज और कुछ प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों से मेल नहीं खाते थे। उनके जाने के बाद केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

 

बाजार में इस बड़ी गिरावट का सबसे ज्यादा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में 439 लाख करोड़ रुपए से घटकर 426 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 13 लाख करोड़ रुपए की भारी कमी दर्ज की गई। यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

 

अगर हाल के दिनों के ट्रेंड पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि बाजार लगातार दबाव में है। ईरान से जुड़े तनाव के बाद से सेंसेक्स में करीब 9% की गिरावट आ चुकी है। 27 फरवरी को जहां सेंसेक्स 81,287 के स्तर पर था, वहीं गुरुवार तक यह गिरकर 74,207 पर पहुंच गया। यह गिरावट दर्शाती है कि वैश्विक घटनाक्रमों का असर भारतीय बाजार पर किस तेजी से पड़ रहा है।

 

कच्चे तेल के संदर्भ में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दुनिया में तेल की कीमतें मुख्य रूप से तीन मानकों ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट के आधार पर तय होती हैं। ब्रेंट क्रूड, जो उत्तरी सागर से निकलता है, वैश्विक बाजार में सबसे ज्यादा प्रभावी है। वहीं WTI अमेरिका का प्रमुख मानक है और OPEC बास्केट खाड़ी देशों द्वारा उत्पादित तेल का मिश्रण होता है। भारत इन सभी स्रोतों से तेल खरीदता है और उनकी औसत कीमत को इंडियन बास्केटकहा जाता है।

 

गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी 18 मार्च को बाजार में तेजी देखने को मिली थी, जब सेंसेक्स 633 अंकों की बढ़त के साथ 76,704 पर बंद हुआ था और निफ्टी भी 23,778 तक पहुंच गया था। उस दिन आईटी और रियल्टी शेयरों में खरीदारी देखी गई थी। लेकिन अगले ही दिन आई यह भारी गिरावट यह दिखाती है कि बाजार फिलहाल बेहद अस्थिर दौर से गुजर रहा है।

 

कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियां निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रही हैं। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अनिश्चित आर्थिक माहौल आने वाले दिनों में भी बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और दीर्घकालिक रणनीति के साथ बाजार में बने रहें।

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