वाराणसी। कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi की कथित टिप्पणी को लेकर दायर याचिका में नया मोड़ आ गया है। वाराणसी की एमपी-एमएलए मामलों की वरिष्ठ अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया था। अब मामले की दोबारा सुनवाई होगी और संबंधित अदालत नए सिरे से पूरे प्रकरण पर विचार करेगी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले को पुनः निचली अदालत के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि याचिका पर कानून के अनुसार पुनर्विचार किया जाए। यह मामला उस कथित बयान से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी पर अमेरिका के एक शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम को लेकर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।
यह याचिका अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय द्वारा दाखिल की गई थी। उनका आरोप है कि विदेश यात्रा के दौरान एक विश्वविद्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में राहुल गांधी ने भगवान श्रीराम को “पौराणिक” बताया और उस युग से जुड़ी कथाओं को काल्पनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया। इसी टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।
इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मामला सुनवाई के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्च अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर आदेश को चुनौती दी थी। अब वरिष्ठ अदालत ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए मामले की फिर से सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता का कहना है कि अदालत ने उनके तर्कों को सुनने योग्य माना है और इसी आधार पर मामले को दोबारा विचार के लिए भेजा गया है। उनका दावा है कि राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि यदि आरोप न्यायिक परीक्षण में सिद्ध होते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत दंड का प्रावधान मौजूद है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस और उसके नेताओं द्वारा समय-समय पर सनातन परंपरा, धार्मिक प्रतीकों और ऐतिहासिक-आध्यात्मिक व्यक्तित्वों को लेकर विवादित टिप्पणियां की जाती रही हैं, जिससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत होती हैं। इसी आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
दूसरी ओर, जिस कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसमें राहुल गांधी से भारत की राजनीति, धर्मनिरपेक्षता और हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़े सवाल पूछे गए थे। जवाब में उन्होंने कहा था कि भारत के महान समाज सुधारकों और विचारकों ने करुणा, सहिष्णुता और समावेशिता का संदेश दिया है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी दृष्टि में नफरत और विभाजन की राजनीति भारतीय मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई निचली अदालत में होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं। राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें धार्मिक आस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानबाजी जैसे संवेदनशील पहलू जुड़े हुए हैं।
अदालत के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है और आने वाले दिनों में इसकी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।