लखनऊ। समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को लखनऊ जिला जेल से एक महीने की अंतरिम पैरोल मिली है। अदालत ने यह राहत उनके परिवार के सदस्यों की गंभीर बीमारी के उपचार के लिए दी है। पैरोल अवधि के दौरान वे अपनी बहन और भाई का इलाज कराएंगे। यह निर्णय जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने कड़ी निगरानी और कई शर्तों के साथ सुनाया है।
2017 के गैंगरेप केस में मिली थी उम्रकैद
गायत्री प्रसाद प्रजापति का नाम 2017 में दर्ज एक गंभीर गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट केस में प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आया था। आरोप था कि उन्होंने एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उन्हें धमकाया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
नवंबर 2021 में विशेष पॉक्सो अदालत ने प्रजापति और उनके दो सहयोगियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से वे लखनऊ जिला जेल में बंद हैं।
परिवार में गंभीर बीमारियां, कोर्ट ने मानवीय आधार पर दी राहत
सितंबर 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रजापति को मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत दी थी, लेकिन गैंगरेप मामले में उनकी जमानत अर्जी खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने पैरोल की याचिका दाखिल की।
याचिका में कहा गया कि उनकी बहन को गंभीर किडनी रोग है और भाई को हृदय संबंधी समस्या है। परिवार के अन्य सदस्य उपचार की देखरेख करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए अदालत से अंतरिम पैरोल की मांग की गई।
अदालत ने रखीं सख्त शर्तें
कोर्ट ने परिवार की स्वास्थ्य रिपोर्टों और मेडिकल साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद पैरोल को मंजूरी दी। हालांकि, अदालत ने इस दौरान तीन स्पष्ट शर्तें लगाई हैं—
1. गायत्री प्रजापति को प्रतिदिन नजदीकी थाने में हाजिरी देनी होगी।
2. वे उत्तर प्रदेश की सीमा से बाहर नहीं जा सकेंगे।
3. पैरोल अवधि में उन्हें राजनीतिक गतिविधियों या सोशल मीडिया बयानबाजी से दूर रहना होगा।
यह पैरोल 4 दिसंबर 2025 तक के लिए है। इसके बाद उन्हें फिर से जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।
गायत्री प्रसाद प्रजापति: संघर्ष और विवादों से भरा राजनीतिक सफर
गायत्री प्रसाद प्रजापति का जन्म 16 जुलाई 1963 को अमेठी जिले के परसावां गांव में हुआ था। शुरुआती जीवन में वे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में पेंटर का काम करते थे। बाद में उन्होंने ठेकेदारी से राजनीति की ओर रुख किया।
राजनीतिक यात्रा के प्रमुख पड़ाव
· 1993: बहुजन क्रांति दल से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन पराजित रहे।
· 1996: मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए और सपा से टिकट मिला, फिर भी जीत नहीं मिली।
· 2002: तीसरी बार चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना किया।
· 2007: टिकट नहीं मिला।
· 2012: चौथी बार सपा से चुनाव लड़ा और कांग्रेस की अमीता सिंह को हराया।
· 2013: अखिलेश यादव सरकार में सिंचाई मंत्री बनाए गए, बाद में खनन विभाग का स्वतंत्र प्रभार मिला।
· 2014: खनन मंत्री रहते हुए भारी विवादों में आए; अवैध खनन और संपत्ति के आरोप लगे।
· 2016: सीबीआई जांच के आदेश के बाद अखिलेश सरकार ने उन्हें बर्खास्त किया, पर कुछ ही दिनों में दोबारा मंत्री बनाया गया।
· 2017: गैंगरेप केस दर्ज होने के बाद गिरफ्तार हुए और उसी वर्ष विधानसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार गरिमा सिंह से हार गए।
गायत्री प्रजापति का राजनीतिक करियर हमेशा विवादों, कानूनी लड़ाइयों और सत्ता संघर्षों से घिरा रहा है। हालांकि, अमेठी में आज भी उनके समर्थक उन्हें “जननेता” मानते हैं।