कोलकाता/नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में सबसे बड़ा धमाका सुवेंदु अधिकारी के नाम को लेकर हुआ है। पार्टी ने उन्हें एक नहीं बल्कि दो सीटों नंदीग्राम और भबानीपुर से मैदान में उतारा है। गौर करने वाली बात यह है कि ये दोनों ही सीटें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आधार क्षेत्र मानी जाती हैं।
सुवेंदु बनाम ममता: एक और हाई-प्रोफाइल मुकाबला
· नंदीग्राम: 2021 के चुनाव में सुवेंदु ने इसी सीट पर ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी।
· भबानीपुर: नंदीग्राम में हार के बाद ममता ने यहां से उपचुनाव जीतकर अपनी सदस्यता बचाई थी। अब BJP ने सुवेंदु को ममता के इस मजबूत किले में सीधा चैलेंज देने के लिए उतारा है।
· डायमंड हार्बर: अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस विधानसभा सीट से BJP ने दीपक कुमार हालदार को प्रत्याशी बनाया है।
· खड़गपुर सदर: पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष यहां से चुनाव लड़ेंगे।
केरल में 'नेमोम' से राजीव चंद्रशेखर मैदान में
बंगाल के साथ-साथ BJP ने केरल के लिए भी 47 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। राज्य की हाई-प्रोफाइल नेमोम सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को टिकट दिया गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर तिरुवनंतपुरम सीट पर शशि थरूर से कड़े मुकाबले में हार गए थे। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में BJP ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव जीतकर केरल की राजनीति में अपनी बढ़ती धमक का संकेत दिया था।
चुनाव का पूरा गणित: तारीखें और रिकॉर्ड
चुनाव आयोग (ECI) ने स्पष्ट किया है कि बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा, जबकि अन्य राज्यों में एक ही दिन वोट डाले जाएंगे।
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राज्य |
मतदान की तारीख |
कुल सीटें |
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पश्चिम बंगाल |
23 अप्रैल और 29 अप्रैल |
294 |
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केरल |
9 अप्रैल |
140 |
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तमिलनाडु |
23 अप्रैल |
234 |
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असम |
9 अप्रैल |
126 |
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पुडुचेरी |
9 अप्रैल |
30 |
नतीजे: सभी चुनावी राज्यों और उपचुनाव वाली 6 सीटों (गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड, त्रिपुरा) के परिणाम 4 मई 2026 को आएंगे।
क्या ममता रचेंगी इतिहास?
यदि 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत होती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बन जाएंगी जो लगातार चार कार्यकाल तक पद पर रहीं। हालांकि जयललिता 5 बार सीएम रहीं, लेकिन उनके कार्यकाल लगातार नहीं थे।
वहीं केरल में, जहां हर 5 साल में सत्ता बदलने का रिवाज रहा है, वहां वाम मोर्चा (LDF) अपनी हैट्रिक की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस विरोधी लहर (Anti-incumbency) के भरोसे वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है।