वाराणसी: आश्विन मास की पावन शरद पूर्णिमा (कोजागरी व रास पूर्णिमा) इस वर्ष अत्यंत फलदायी योगों के संयोग में मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस पर्व पर सर्वार्थसिद्धि, रवि, हर्षण, ययीजय और प्रवर्धमान सहित छह विशेष महायोग बन रहे हैं। इस निशा में चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत तत्व और आरोग्य की वर्षा करता है।
तिथि, मुहूर्त और पूजन विधान
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व ज्योतिषाचार्य प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:06 बजे आरंभ होकर अगले दिन 26 अक्टूबर को पूर्वाह्न 9:58 बजे तक प्रभावी रहेगी। चूंकि चंद्र दर्शन और रात्रिकालीन पूजा 25 अक्टूबर को ही सुलभ होगी, इसलिए व्रत की पूर्णिमा 25 अक्टूबर को ही रखी जाएगी। 26 अक्टूबर को उदया तिथि मिलने के कारण स्नान-दान का महत्व दिनभर बना रहेगा।
25 अक्टूबर को शाम 5:36 बजे चंद्रोदय होगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:42 से 12:27 बजे तक रहेगा, जबकि गोधूलि वेला में शाम 5:42 से 6:07 बजे के बीच पूजा का श्रेष्ठ समय है। चंद्र देव को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य देने, सफेद पुष्प अर्पित करने और श्वेत मिष्ठान्न का भोग लगाने की परंपरा है। रात में बनाई गई खीर को खुले आकाश के नीचे चांदनी में रखा जाएगा, जिसे अगली सुबह प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से शारीरिक व्याधियों से मुक्ति और आरोग्य की प्राप्ति मानी जाती है।
दशाश्वमेध घाट पर वीरों को नमन
पर्व के अवसर पर ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर पुलिस और पीएसी के अमर बलिदानियों की स्मृति में आकाशदीप प्रज्वलित किए जाएंगे। गंगोत्री सेवा समिति के सचिव दिनेश शंकर दुबे ने जानकारी दी कि 25 अक्टूबर की शाम 5:00 बजे राष्ट्ररक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि स्वरूप दीपदान किया जाएगा। इस दौरान गंगा तट दीपों की आभा से आलोकित रहेगा।