धनतेरस पर कल खुलेंगे मां अन्नपूर्णा के कपाट, स्वर्णमयी प्रतिमा के होंगे दर्शन, 'खजाना' पाने को 24 घंटे पहले से ही लगीं लंबी कतारें

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वाराणसी। काशी में धनतेरस के पावन पर्व पर अन्न और वैभव की अधिष्ठात्री मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी विग्रह के वार्षिक दर्शन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। वर्ष में केवल एक बार मिलने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए एक दिन पहले से ही काशी की गलियों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। बांसफाटक से लेकर मंदिर परिसर तक भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

 

साल में सिर्फ चार दिन का दुर्लभ अवसर

 

मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन केवल धनतेरस से लेकर अन्नकूट (यम द्वितीया) तक, कुल चार दिनों के लिए ही सुलभ होते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव ने भी संसार के भरण-पोषण के लिए मां अन्नपूर्णा से ही भिक्षा मांगी थी। इस दौरान मां के दर्शन मात्र से घर-परिवार में अन्न, धन और समृद्धि की कभी कमी नहीं रहती।



खजाना और धान का लावा पाने की होड़

 

दर्शन के साथ-साथ भक्तों को मंदिर प्रबंधन द्वारा विशेष 'सिक्का' (खजाना) और धान का लावा (प्रसाद) वितरित किया जाता है। मंदिर के महंत शंकरपुरी ने बताया कि इस सिक्के को अपनी तिजोरी अथवा गल्ले में रखने से वर्ष भर बरकत बनी रहती है। इसी महाप्रसाद को पाने के लिए देश के कोने-कोने से आए भक्त घंटों कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।



सादे कपड़ों में पुलिस तैनात

 

श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। गोदौलिया, बांसफाटक और चौक क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई है। पूरे मंदिर परिक्षेत्र और गलियों पर पैनी नजर रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। कतार में लगे वृद्ध, महिलाओं और बच्चों के लिए स्वयंसेवकों द्वारा पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को भोर में ब्रह्म मुहूर्त में महंत द्वारा विधि-विधान से महाभिषेक, विशेष पूजन और आरती संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

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