गंगा पर आकार ले रहे भव्य डबल-डेकर सिग्नेचर ब्रिज का नाम होगा 'नमो सेतु': रेल मंत्री ने किया ऐलान, 100 साल तक संभालेगा ट्रैफिक का लोड; जानिए खासियत

https://admin.thefrontfaceindia.in/uploads/1618616205_signature_bridge_in_varanasi.jpg

वाराणसी: मोक्षनगरी काशी में गंगा की लहरों पर तैयार हो रहे महत्वाकांक्षी ट्रांस-गंगा रेल-सह-सड़क सिग्नेचर ब्रिज को अब आधिकारिक तौर पर 'नमो ब्रिज' के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय रेल, संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों और निर्माणाधीन सेतु का स्थलीय निरीक्षण करने के उपरांत इस नामकरण की घोषणा की। उन्होंने बताया कि काशी रेलवे स्टेशन को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक मॉडल स्टेशन का स्वरूप दिया जा रहा है।

 

 

प्रस्तावित महा-पुल नमो घाट के समीप गंगा नदी पर निर्मित किया जा रहा है। यह देश का अनूठा दोमंजिला (डबल-डेकर हाइब्रिड) ढांचा होगा। इसकी तकनीकी रूपरेखा के अनुसार, पुल के ऊपरी डेक पर छह लेन का एक्सप्रेस हाईवे बनाया जाएगा, जबकि निचले डेक पर चार ब्रॉडगेज रेल पटरियां बिछाई जाएंगी। रेल मंत्री ने निरीक्षण के दौरान रेखांकित किया कि इस बहुउद्देशीय कॉरिडोर की डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग क्षमता को आगामी 100 वर्षों के यातायात दबाव एवं जन-आवश्यकताओं को आंकते हुए तैयार किया गया है।

 

 

'नमो ब्रिज' का सीधा जुड़ाव काशी रेलवे स्टेशन से स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से वाराणसी रेल मंडल की परिचालन क्षमता (लाइन कैपेसिटी) में कई गुना वृद्धि होगी और ट्रेनों के आउटर पर ठहरने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। इससे न केवल काशी आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और सैलानियों को जाममुक्त पारगमन मिलेगा, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाले प्रमुख रेल गलियारों को भी निर्बाध गतिशीलता हासिल होगी।

 

 

उल्लेखनीय है कि इस निरीक्षण से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री ने बनारस जंक्शन से देश की पहली वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस सहित क्षेत्रीय मेमू सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही काशी और समूचे पूर्वांचल के कायाकल्प से जुड़ी कई अन्य अधोसंरचनात्मक सौगातें भी जनता को समर्पित की गईं।

 

इसे भी पढ़ें

Latest News