'कोर्ट को कोई डरा नहीं सकता, हम काल्पनिक दुनिया में नहीं रहते': सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी मार्च पर CJI की सख्त टिप्पणी, राहुल-अखिलेश समेत 16 नेताओं को नोटिस

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नई दिल्ली: 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च और परिसर में जुटने के मामले पर देश की शीर्ष अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी संस्थान या व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट को डरा-धमकाकर या दबाव बनाकर प्रभावित नहीं कर सकता; ऐसी तमाम कोशिशें पूरी तरह बेअसर हैं।

 

 

चीफ जस्टिस ने दो-टूक कहा कि अदालत को भली-भांति पता है कि बाहर क्या माहौल बनाया जा रहा है और अंदर क्या चल रहा है—न्यायपालिका किसी भ्रम या काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रही है। बिना नाम लिए उन्होंने संकेत दिया कि याचिकाकर्ताओं में शामिल एक प्रमुख नेता के बर्ताव पर सवाल किए जाएंगे और उन्हें इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

 



शीर्ष अदालत की प्रमुख कार्रवाइयां

 

  • 16 विपक्षी नेताओं को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट परिसर में बिना पूर्व अनुमति भीड़ जुटाने और राजनीतिक हलचल के मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित 14 अन्य नेताओं को औपचारिक नोटिस भेजा गया है।

 

  • SIR प्रक्रिया व चुनाव आयोग से जवाब तलब: विपक्षी नेताओं द्वारा मतदाता सूची (SIR प्रक्रिया) और निर्वाचन आयोग के निर्णयों के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार एवं चुनाव आयोग से जवाब मांगा गया है।

 

  • CCTV व डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश: प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की के आरोपों पर वकील गौरव भाटिया की मांग के बाद, जस्टिस बागची ने संबंधित एजेंसियों को उस दिन के तमाम सीसीटीवी और डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए हैं।

 

  • आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग: प्रदर्शन का आह्वान करने वाले नेताओं पर सार्वजनिक व व्यक्तिगत नुकसान की सीधी जवाबदेही तय करने वाली याचिका पर भी कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

 

  • सोशल मीडिया पोस्ट पर संज्ञान: सुनवाई में केरल कांग्रेस के एक हटाए जा चुके सोशल मीडिया पोस्ट को अदालत की अवमानना बताते हुए कार्रवाई की मांग भी दर्ज कराई गई।

 

क्या था विवाद का पूरा घटनाक्रम?

मामले की शुरुआत तब हुई जब 11 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने सीजेआई से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपने का समय मांगा था। चीफ जस्टिस द्वारा समय देने से इनकार करने के बाद, 12 अक्टूबर की शाम को विपक्षी दलों ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेता अचानक सुप्रीम कोर्ट परिसर में दाखिल हो गए थे। इसी घटनाक्रम के विरोध में चार वकीलों ने याचिका दायर कर अदालत परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और आयोजकों की मंशा की जांच की मांग की है।

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