तेल का बड़ा निर्यातक UAE खुद महंगे ईंधन की मार झेलने को मजबूर; भारत में दिल्ली समेत कई शहरों में डीजल सस्ता

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दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इन दिनों ईंधन की कीमतें अप्रत्याशित स्तर पर पहुंच गई हैं। खाड़ी देश होने के बावजूद वहां डीजल के खुदरा भाव भारत की तुलना में काफी अधिक हो गए हैं। 22 अक्टूबर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दुबई में एक लीटर डीजल के लिए उपभोक्ताओं को करीब ₹123 चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि नई दिल्ली में इसकी कीमत लगभग ₹95 प्रति लीटर बनी हुई है। यानी दिल्ली की तुलना में दुबई में उपभोक्ताओं को ₹28 प्रति लीटर अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।

 

 

 

अक्टूबर महीने में UAE सरकार ने डीजल की दरों में 12% की बढ़ोतरी की है। यदि बीते आठ महीनों का रुझान देखें, तो वहां कीमतों में करीब 90% का तीव्र उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते आम नागरिकों के लिए ईंधन लगभग दोगुना महंगा हो चुका है।



भारतीय शहरों में डीजल की स्थिति

 

 

दुबई के ₹123 प्रति लीटर के मुकाबले भारत के प्रमुख महानगरों में दरें काफी कम हैं:

 



  • मुंबई: ₹98 प्रति लीटर

 

 

  • कोलकाता: ₹100 प्रति लीटर

 

 

  • चेन्नई: ₹100 प्रति लीटर

 

 

  • हैदराबाद: ₹105 प्रति लीटर

 

 

UAE में ईंधन महंगा होने की प्रमुख वजहें

 

1.     वैश्विक बाजार से सीधा जुड़ाव: भारत में जहां तेल विपणन कंपनियां कई बार स्थानीय स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास करती हैं, वहीं UAE में ईंधन की दरें पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव पर आधारित हैं। वहां की फ्यूल प्राइस कमेटी हर माह वैश्विक कीमतों की समीक्षा कर खुदरा दाम तय करती है।

 

 

2.     भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संकट: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते तेल परिवहन में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। आपूर्ति शृंखला बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार में तेजी आई, जिसका सीधा असर UAE के खुदरा पंपों पर पड़ा।

 

 

UAE के प्रमुख तेल खरीदार (दैनिक आंकड़े)

 

 

UAE वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है, जिसमें प्रमुख आयातक देश इस प्रकार हैं:

 



  • जापान: लगभग 7.78 लाख बैरल/दिन

 

 

  • चीन: लगभग 7 लाख बैरल/दिन

 

 

  • भारत: लगभग 5.35 लाख बैरल/दिन

 

 

  • दक्षिण कोरिया: लगभग 3.08 लाख बैरल/दिन

 

 

तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों का दबाव

 

 

हाल के महीनों में UAE के ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों ने भी तेल प्रबंधन और निर्यात पर गंभीर दबाव डाला है:

 



  • 14 मार्च: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फुजैराह तेल टर्मिनल पर हमले के चलते आग लगी और जहाजों में तेल लोडिंग को अस्थायी तौर पर रोकना पड़ा।

 

 

  • 19 मार्च: अबू धाबी के हबशान गैस प्लांट और बाब ऑयल फील्ड के पास मिसाइल रोधी कार्रवाई के मलबे गिरने के बाद सुरक्षा कारणों से उत्पादन रोकना पड़ा।

 

 

  • 4 मई: फुजैराह के औद्योगिक क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले में आग लगी, जिसकी चपेट में आकर तीन भारतीय कामगार घायल हुए।

 

 

  • रॉयटर्स की पड़ताल: एक विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के दौरान फुजैराह पर कम से कम 19 बार हमले किए गए, जिससे तेल भंडारण टैंकों और पाइपलाइन नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंचा। मार्च तक यहां से होने वाली दैनिक तेल लोडिंग घटकर करीब 4.4 लाख बैरल रह गई, जो वर्ष 2025 के सामान्य स्तर के मुकाबले आधी से भी कम थी।

 

 

होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित होने के कारण फुजैराह UAE के लिए एक सुरक्षित बाईपास मार्ग माना जाता है। इन हमलों के चलते तेल ढुलाई का यह प्रमुख वैकल्पिक मार्ग लगातार रणनीतिक व परिचालन चुनौतियों का सामना कर रहा है।

 

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