रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। जेल में करीब आठ घंटे तक चली गहन पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आजम खां और चार अन्य सहयोगियों व संस्थाओं के विरुद्ध नई प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह पूरा मामला मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य के दौरान 416.14 करोड़ रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय के उप निदेशक पीयूष एस. थोरेट की तहरीर पर रामपुर के अजीमनगर थाने में मंगलवार देर रात यह मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित इस निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में सार्वजनिक और सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ-साथ ट्रस्ट के आय स्रोतों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसी सिलसिले में ईडी की विशेष टीम सोमवार रात रामपुर पहुंची थी और मंगलवार को जिला कारागार में बंद आजम खां से मैराथन पूछताछ की गई। एफआईआर में मुख्य रूप से मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, एसएस इंटरप्राइजेज और एसएससीके एसोसिएट को भी नामजद करते हुए आरोपी बनाया गया है। एजेंसी अब इस वित्तीय हेराफेरी से जुड़े अन्य बैंक खातों और लेन-देन की कड़ियों को खंगालने में जुटी है।