उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जा चुके पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस फैसले के बाद देशभर में विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं और पीड़िता का परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले को अधिवक्ता अंजले पटेल ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता और उसकी मां ने राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि, पुलिस ने उन्हें वहां से हटाते हुए प्रदर्शन खत्म करा दिया। इस घटना के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। पीड़िता के परिजनों का कहना है कि सेंगर की रिहाई से उन्हें जान का खतरा है और न्याय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिवक्ता अंजले पटेल द्वारा दायर याचिका में कुलदीप सेंगर को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई है। खास बात यह है कि अंजले पटेल इस मामले में प्रत्यक्ष रूप से पक्षकार नहीं हैं। इस केस के मुख्य पक्षकार केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और पीड़िता का परिवार हैं। पहले ही पीड़िता के परिजनों ने संकेत दिया था कि वे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। वहीं, सीबीआई भी इस मामले में शीर्ष अदालत का रुख कर चुकी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में सामने आए इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। आरोप था कि कुलदीप सेंगर ने एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया। मामले की गंभीरता और जनआक्रोश को देखते हुए लंबी जांच और सुनवाई के बाद साल 2019 में कोर्ट ने सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद अब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने को लेकर कई सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने नाराजगी जताई है।
पीड़िता के परिवार का कहना है कि सेंगर के बाहर आने की संभावना से वे भयभीत हैं। हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि सेंगर पर पीड़िता के पिता की हत्या से जुड़ा एक अन्य गंभीर मामला भी चल रहा है। इस केस में वह अभी न्यायिक हिरासत में है, जिसके चलते उसकी तत्काल रिहाई संभव नहीं है।
रेप केस में मिली जमानत को सख्त शर्तों के साथ जोड़ा गया है। अदालत के आदेश के अनुसार सेंगर पीड़िता के घर से पांच किलोमीटर के दायरे में प्रवेश नहीं कर सकेगा और अपील लंबित रहने तक उसे दिल्ली में ही रहना होगा। इसके अलावा पीड़िता के परिवार से किसी भी तरह का संपर्क या धमकी देने पर रोक है। उसे अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा और हर सोमवार को संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी देनी होगी। इन शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत स्वतः रद्द हो जाएगी।