पटना। यूपी के झांसी में ज्वेलरी दुकानों से जुड़े सुरक्षा नियमों के बाद अब बिहार में भी सर्राफा कारोबारियों ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन ने बुधवार, 7 जनवरी से राज्य भर की ज्वेलरी दुकानों में सुरक्षा को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत अब हिजाब, नकाब, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर सोने-चांदी की दुकानों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस निर्णय की सूचना दुकानों के बाहर नोटिस के रूप में चस्पा की जा रही है, जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि चेहरा ढककर दुकान में आना प्रतिबंधित है।
एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला किसी विशेष समुदाय, धर्म या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरी तरह से सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बीते कुछ महीनों में बिहार के कई जिलों में सर्राफा दुकानों में लूट, चोरी और हथियारबंद वारदातों के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। कई घटनाओं में अपराधियों ने चेहरा ढककर दुकान में घुसकर वारदात को अंजाम दिया और पहचान से बचते हुए फरार हो गए। इसी वजह से दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता बन गई है।
ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि सर्राफा कारोबार हमेशा से अपराधियों के निशाने पर रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही घटनाओं में सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि चेहरा ढका होता है। इसी समस्या से निपटने के लिए यह निर्णय लिया गया है, ताकि दुकानों में आने वाले हर व्यक्ति की पहचान स्पष्ट हो सके।
राज्य के अलग-अलग जिलों से इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
गयाजी में ज्वेलर नीरज कुमार वर्मा का कहना है कि केवल बुर्का या हिजाब ही नहीं, बल्कि हेलमेट और मास्क हटाने पर भी किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस कल किसी संदिग्ध के बारे में पूछताछ करेगी, तो दुकानदार क्या जवाब देंगे। सभी की सुरक्षा के लिए नियम समान होने चाहिए।
कटिहार में कल्याण ज्वेलर्स के मालिक मो. अशफाक ने एसोसिएशन के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि भले ही अभी उनकी दुकान पर ऐसा नोटिस नहीं लगाया गया है, लेकिन स्टाफ और सुरक्षा गार्ड को पहले से ही सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उनके अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से यह कदम व्यावहारिक है।
समस्तीपुर में स्वर्ण वाटिका ज्वेलरी शॉप के मालिक कंधार अनिल कुमार ने भी सुरक्षा के नजरिए से निर्णय को सही बताया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन नियमों से व्यापार प्रभावित न हो, इस पर संतुलन बनाना भी जरूरी है।
मुजफ्फरपुर के ज्वेलर पवन कुमार ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों में चेहरा स्पष्ट दिखना जरूरी है, जो हिजाब या नकाब में संभव नहीं हो पाता। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि जिले में अभी तक संघ की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिला है और आगे जो निर्णय होगा, उसका पालन किया जाएगा।
मधुबनी में जिला स्वर्ण व्यवसाई संघ ने इस फैसले का स्वागत किया है। मां अंबे ज्वेलर्स के मालिक टिंकू कसेरा ने कहा कि जल्द ही जिले की अधिकांश ज्वेलरी दुकानों के बाहर इस संबंध में बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि नियमों को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।
हालांकि, सभी जगह इस फैसले को लेकर सहमति नहीं दिख रही है। शिवहर में न्यू अलंकर ज्वेलर्स के मालिक मनोज कुमार सोनी ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि व्यापार में धर्म या पहनावे के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, हर ग्राहक उनके लिए समान है और इस तरह के नियम व्यापार की मूल भावना के खिलाफ हैं।
नालंदा में गोवर्धन लाल रस्तोगी ज्वेलर्स के ऑनर मनोज कुमार रस्तोगी ने भी फैसले का विरोध करते हुए कहा कि अगर ऐसा कोई निर्देश है तो वे इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी दुकानदारों को खुद उठानी चाहिए, न कि ग्राहकों पर प्रतिबंध लगाकर।
इस बीच, इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। राजद ने सुरक्षा के नाम पर हिजाब और नकाब को निशाना बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि यह भारत है और यहां सुरक्षा नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।