नींद की नकली दवाओं का यूपी कनेक्शन, वाराणसी का कृष्णा दो साल पहले गर्भवती पत्नी को छोड़ गया, पिता और भाई करते हैं खेती, पढ़िए पूरा बैकग्राउंड

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लखनऊ। मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के बाद देशभर में प्रतिबंधित और नकली दवाओं के अवैध कारोबार को लेकर एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही जांच एजेंसियों के सामने अब एक नई और जटिल चुनौती आ खड़ी हुई है। राजस्थान में नींद की नकली दवाएं बनाने वाली फैक्ट्री से गिरफ्तार किए गए तीन केमिकल इंजीनियरों का सीधा संबंध उत्तर प्रदेश से सामने आया है।

 

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अंशुल, अखिलेश कुमार मौर्य और कृष्णा यादव शामिल हैं। अंशुल आगरा का निवासी बताया जा रहा है, जबकि अखिलेश भदोही और कृष्णा यादव वाराणसी जिले से ताल्लुक रखते हैं। एजेंसियां अब इन तीनों की शैक्षणिक, पारिवारिक और पेशेवर पृष्ठभूमि को खंगालने में जुटी हैं ताकि यह समझा जा सके कि पढ़े-लिखे युवाओं का रुझान इस खतरनाक और गैरकानूनी कारोबार की ओर कैसे हुआ।

 

वाराणसी का कृष्णा यादव: होनहार छात्र से संदिग्ध कारोबारी तक

 

कृष्णा यादव वाराणसी के तेवर गांव का रहने वाला है। गांव वालों के मुताबिक वह पढ़ाई में शुरू से ही तेज था। दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने पर उसे पुरस्कार स्वरूप साइकिल भी मिली थी। सिंधोरा क्षेत्र के पलईपट्टी स्थित स्कूल से 12वीं करने के बाद उसने पांडेयपुर स्थित आर्यभट्ट कोचिंग में दो साल तक इंजीनियरिंग की तैयारी की। इसके बाद वह बरेली चला गया, लेकिन वहां किस कॉलेज से पढ़ाई की, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि कृष्णा ने घर वालों को बताया था कि वह दमन में नौकरी करता है। करीब दो साल पहले पत्नी को प्रसव के समय गांव छोड़कर गया, लेकिन इसके बाद उसे अपने साथ नहीं ले गया। वह साल-दो साल में कभी-कभार ही गांव आता था। उसका दो साल का एक बेटा है, जबकि खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी उसके पिता श्री यादव और छोटा भाई संभालते हैं। गांव या जिले में उसके खिलाफ किसी तरह का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

 

गिरफ्तारी की खबर के बाद से उसके पिता किसी से बात नहीं कर रहे हैं, जिससे गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

 

भदोही का अखिलेश मौर्य: शांत परिवार, चौंकाने वाली गिरफ्तारी

 

भदोही जिले के ऊंज थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव निवासी अखिलेश कुमार मौर्य चार भाइयों में दूसरे नंबर पर है। उसने इंटर की पढ़ाई विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज, ज्ञानपुर से की और आगे चलकर काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से केमेस्ट्री में एमएससी किया। इसके बाद उसे बुआ के बेटे के जरिए भिवाड़ी की एक दवा कंपनी में नौकरी मिल गई, जहां वह पत्नी प्रियंका और दो बेटियों के साथ रहता था।

 

गांव के लोगों के अनुसार अखिलेश का परिवार शांत और सामान्य जीवन जीने वाला है। घर में ट्रैक्टर और बोलेरो गाड़ी है, जबकि दो भाई गुजरात में निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। पिता पारसनाथ मौर्य ने बेटे के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। पड़ोसियों का कहना है कि अखिलेश की गिरफ्तारी की खबर ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया, क्योंकि परिवार या उसके किसी सदस्य पर पहले कभी कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

 

आगरा का अंशुल: फर्जी पते की गुत्थी

 

तीसरा आरोपी अंशुल आगरा के राजामंडी क्षेत्र का बताया जा रहा है, लेकिन जांच के दौरान उसके बताए पते पर कोई नहीं मिला। एजेंसियों को संदेह है कि उसने जानबूझकर फर्जी पता दिया था, जिससे उसके नेटवर्क और गतिविधियों पर और सवाल खड़े हो गए हैं।

 

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये तीनों कैसे एक-दूसरे के संपर्क में आए, नकली दवाओं के इस अवैध कारोबार में उनकी भूमिका क्या थी और इसके तार उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक कितने गहरे जुड़े हैं। 

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